शनिवार 25 जुलाई 2026 - 09:47
बसीरत और एकता ही इस्लामी समाज की सबसे बड़ी ताकत।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मदी

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मदी ने समाज में दूरदृष्टि बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज पहले से कहीं अधिक अम्मार जैसी बसीरत रखने वाले लोगों की ज़रूरत है। ऐसे लोग जो दुश्मन के मोर्चे और उसकी साज़िशों को सही ढंग से पहचानें तथा समाज को मनोवैज्ञानिक युद्ध, फूट डालने की कोशिशों और दुश्मनों के षड्यंत्रों से बचा सकें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मदी ने समाज में दूरदृष्टि बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज पहले से कहीं अधिक अम्मार जैसी बसीरत रखने वाले लोगों की ज़रूरत है। ऐसे लोग जो दुश्मन के मोर्चे और उसकी साज़िशों को सही ढंग से पहचानें तथा समाज को मनोवैज्ञानिक युद्ध, फूट डालने की कोशिशों और दुश्मनों के षड्यंत्रों से बचा सकें।

उन्होंने जनता की निरंतर और उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यही उपस्थिति इस्लामी व्यवस्था की शक्ति और दुश्मनों की निराशा का कारण है। उन्होंने अरबईन के अवसर पर इमाम हुसैन (अ.स.) के ज़ायरीन की सेवा में लगे मौकिब संचालकों और समाजसेवियों का भी धन्यवाद किया।

उन्होंने अरबईन यात्रियों से अपील की कि वे अपनी यात्रा की उचित योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि अरबईन की पैदल यात्रा अत्यंत पुण्य का कार्य है, लेकिन इस प्रकार व्यवस्था हो कि देश के सांस्कृतिक और क्रांतिकारी मोर्चे भी खाली न रहें और दुश्मन किसी भी प्रकार के अवसर का लाभ न उठा सके।

इमाम ए जुमआ ने हज़रत अम्मार बिन यासिर (रज़ि.) की शहादत की बरसी का उल्लेख करते हुए बसीरत, दुश्मन की पहचान और विरोधी तत्वों से दूरी बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

उन्होंने इस्लामी क्रांति के बाद आयोजित पहली जुमे की नमाज़ की वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि जुमे की नमाज़ समाज में एकता और जागरूकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने नमाज़-ए-जुमा के आयोजकों, इमामों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।कारोबार और तकनीकी शिक्षा दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि आज देश को पहले से अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता है।

तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा कर सकता है और श्रम बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि दुश्मन सैन्य हमलों, मनोवैज्ञानिक युद्ध और आर्थिक दबाव के माध्यम से देश की रक्षा क्षमता को कमज़ोर करने, जनता और अधिकारियों के बीच दूरी पैदा करने तथा समाज में निराशा फैलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरानी जनता ने अपनी एकता और जागरूकता से इन सभी साज़िशों को विफल कर दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुश्मन जातीय, धार्मिक, पीढ़ीगत और राजनीतिक मतभेदों को हवा देकर राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाना चाहता है, लेकिन जनता और ज़िम्मेदार अधिकारियों की सतर्कता उसके इन प्रयासों को सफल नहीं होने देगी।

अंत में उन्होंने कहा कि देश के अधिकारियों को सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन के अनुसार एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। जनता चाहती है कि अधिकारी दुश्मनों की धमकियों, अपमानजनक रवैये और अनुचित दबाव के सामने दृढ़ और समन्वित रुख अपनाएँ तथा राष्ट्रीय हितों और देश की गरिमा की रक्षा करें।

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